Sunday, April 13, 2014

देश में महंगाई केवल सरकारी विभागों में...

सरकार की नज़रों में देश की जनता पर महंगाई का असर नहीं 



महंगाई देश में अमीरों और कालाधन अर्जित करने वालों को छू तक नहीं पाती, इसकी असहनीय मार सबसे ज़्यादा गरीब और माध्यम वर्गीय सभी भारतियों को झेलनी पड़ती है लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय सरकार की नज़रों में  महंगाई केवल सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मियों और भारतीय सैनिक बलों  के लिए ही बढ़ी है, आम जनता के लिए नहीं, तभी तो हर साल बेलगाम महंगाई पर रोक लगाने की बजाय वेतन आयोग की जाँच पड़ताल के बाद उसके अनुरोध पर महंगाई भत्ता सिर्फ सिविल और सरकारी सैनिक अफसरों को दे दिया जाता है. वास्तव में यह उनके लिए महंगाई भत्ता नहीं, बल्कि राजभक्ति और वफादारी का इनाम है तभी तो उन्हें कभी 2 % कभी 3% देकर ही शांत कर दिया जाता है और चुनाव के दौरान 10% तक बढाकर घोषणा की जाती है  ताकि सरकारी कर्मीं और उनके परिवार वाले अपनी वफ़ादारी निभाते हुए उन्हें मत देकर हमेशा की तरह चुनाव में जीता सकें.

हम देश में उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार को अगर थोड़ी देर के लिए भुला भी दें तो हम यह कटु वास्तविकता कभी भुला नहीं पाएंगे की सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार सरकारी विभागों में ही विधमान है यानि उनके पास सबसे ज़्यादा कालाधन है महंगाई से बचने के लिए. मेरा ये वाक्य उन निष्ठावान कर्मियों पर बिलकुल लागू नहीं होता जो पूरी ईमानदारी के साथ देश सेवा में कार्यरत हैं .


लेकिन इस बार के क्रन्तिकारी चुनाव में केवल सरकारी नौकर ही नहीं बल्कि सभी देशवासी बढ़ चढ़ कर इस भ्रष्ट कांग्रेस सरकार के विरुद्ध मतदान करने की ठान चुकें हैं. कांग्रेस सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना चुके हैं. इस बार देश में जगह जगह प्रांतों में बड़ी संख्या में मतदाताओं की उपस्थिति सभी  पुराने कीर्तिमानों को तोड़ रही है. देश की अब तक की सबसे भ्रष्टतम्  कांग्रेस सरकार का केंद्र से जाना मानो तय हो चुका है बस केवल परिणाम आने भर तक की देर है.

'जैसे को तैसा',  कांग्रेस ने देश की दुर्गति की अब कांग्रेस की दुर्गति की बारी है.

देश का इतिहास साक्षी है, जब जब नए मतदाताओं ने घरों से निकल कर भारी संख्या में चुनावों में मतदान दिया है तो देश की भ्रष्ट सरकारों को बदलने के लिए ही दिया है. बदलाव की इस तेज़ आंधी में इस बार 16 मई के बाद चुनावी परिणाम बड़े चौंकाने वाले होंगे. यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस संसद के आम चुनाव के  परिणाम दिल्ली विधानसभा के परिणामों की तर्ज पर भी हो सकते हैं. 

देश सत्ता परिवर्तन चाहता है, व्यवस्था परिवर्तन चाहता है.
देश एक स्वच्छ विकल्प चाहता था जो उसे आम आदमी पार्टी के रूप में मिल चुका है 


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