Monday, April 13, 2015


Dear AAP volunteers, supporters & voters, 

Since, we have been the backbone, significant part & parcel of this meaningful revolution in our country for past couple of years to establish a new political alternative that stands for UTMOST TRANSPARENCY & ACCOUNTABILITY in our system, it becomes imperatively important for all of us to attend this crucial meeting for #SwarajSamwad that is taking place tomorrow at Delhi at the following address. 

The recent inner party crisis of AAP that led to undemocratic & pre-scripted ouster of senior leaders like Prashant Bhushan, Yogendra Yadav & others had broken my heart to pieces. Their invaluable contribution to build this party can not be denied by all of us. 

Did we extend our strength & support to see this this day that can lead to shattering of our dreams for BRIGHTER INDIA?? 

The said issue compelled me to write couple of posts against the dictatorial attitude of Arvind Kejriwal who had earlier been THE HERO OF MY ADMIRATION. I found this update important for all the supporters, volunteers and voters and therefore I am putting it here on my blog for your kind attention. 

Much as I wish to, I would not be there personally since I am based in Mumbai but my heart, soul & good wishes are there with you fellows to make is a huge success if you are the ones who refuse to follow PERSONALITY CULT but the TRUE VALUES, SPIRIT AND IDEOLOGY of the party.

An outstanding video message from California for all of us. Do Click on it & watch it

14 अप्रैल को होने वाले स्वराज संवाद की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं. हमने शुरुआत में अंदाजा लगाया था कि देश भर से आमंत्रित पार्टी सदस्य और शुभचिंतकों की संख्या 800 से 1000 तक रहेगी. लेकिन पिछले कुछ दिनों के अप्रत्याशित भागीदारी को देखते हुए हमें बैठक स्थल बदलना पड़ रहा है.
स्वराज संवाद की बैठक अब शुभ-वाटिका, शीतला माता रोड, अतुल कटारिया चौक के पास, गुड़गांव में होगी. नज़दीकी मेट्रो MG रोड स्टेशन है.

Dear Friends,
The response from all of you have been overwhelming. We have received much more registrations than our expectation due to which we are forced to changed our venue in order to accommodate more people.
Please note the new venue:
Shubh Vatika, Sheetla Mata Road, Near Atul Kataria Chowk, Gurgaon, Gurgaon - 122001
Nearest Metro: MG Road, Gurgaon
The link to the map is given below:

Join a Dialogue on the Present ......and let’s Plan the Future of Alternative Politics in India


Quest for alternative politics is standing at crossroads today. It is time to pause and think, reflect and plan our way forward. You are invited for ‘Swaraj Samvad’, a dialogue to be held on the 14th of April. Your voice and opinion matter.

Nearly four years ago many of us had begun a journey that could change the trajectory of politics. Under the banner of “Janlokpal Andolan”, many of us travelled through Jantar Mantar, Ramlila Maidan and India Gate to explore various ways of transforming this country and re-energize our people. We decided that:

1. We could not shirk politics.
2. We did not want to be yet another political party.
3. We aimed at nothing short of defining a new kind of politics
4. We wanted politics to set new ethical standards and a new policy paradigm
5. Indeed we envisioned a new kind of inclusive political organization.

We dreamt of ‘Swaraj’ -- both for ourselves, the country and for the movement.

This journey is at crossroads. We know for a fact that the spirit of selfless idealism is alive and thriving in our country, that the political establishment is more fragile than it looks, and that given an effective option the people are willing to embrace an alternative.

- We also face numerous challenges in this journey. We need to ask ourselves;

- Has our horizon shrunk from national politics to that of a regional formation or a city state?

- Has a political movement being reduced to an election machine?

- Are we at risk of falling prey to the ills of established political cults and success-at-any-cost?

The developments of the last few weeks have been a timely reminder of some of these risks.

We face many paths today. Some would like to continue on the same path with the belief that this decline is temporary and will be corrected soon. But what if the recent trends continue and we go from bad to worse?

There is another path of minor course correction, involving repair from within. But is that option available to us today?

The third path leads away from politics altogether, into non-political movements and action. But is this not abdication of our historic responsibility?

Finally, there is a new path that involves restarting the journey of alternative politics so as to remain true to the original spirit of the andolan. But do we have the stamina for this journey?

YOU will help define this trajectory. Your voice will lead the future. Come participate in this dialogue with us.

This is a pre invite to SWARAJ SAMWAD an open dialogue on these and other questions. This is not a gathering for or against someone. This is not an act of rebellion, unless asking questions and seeking truthful answers is cons trued to be so. This is not an act of indiscipline, if anything we seek the highest inner discipline that truth imbibes.

The dialogue takes place in Gurgaon from 10 am to 5 pm on 14th April, which also happens to be Ambedkar Jayanti and New Year in many parts of our country.

We have invited a select group of participants and well-wishers of the movement. If you would like an invitation for yourself or any friend, please fill a pre-registration form at

You could also send us an email at The venue is very close to the IFFCO Chowk station of the Delhi Metro. Will keep you informed about other logistics.

Looking forward to meeting you and the dialogue,

We remain, yours,

Invitation from

स्वराज संवाद: वैकल्पिक राजनीति की दशा और दिशा:

आज देश में वैकल्पिक राजनीति की यात्रा एक चौराहे पर खड़ी है. यह एक निर्णायक घड़ी है वैकल्पिक राजनीति की दशा का मूल्यांकन करने की. यह एक घड़ी है भविष्य की दिशा तय करने की. इसलिए इस यात्रा के कुछ हमसफ़र आंबेडकर जयंती, 14 अप्रैल को मिल-बैठकर एक चर्चा आयोजित कर रहे हैं.

आज से कोई चार बरस पहले हम सबने एक असंभवप्राय सी यात्रा शुरू की थी. जनलोकपाल की मांग को लेकर जंतर-मंतर, रामलीला मैदान और इंडिया गेट से होती हुई यह यात्रा ना जाने कितने पडाओं पर ठहरी, लेकिन रुकी नहीं. इस देश को बदलने का संकल्प लिए इस यात्रा ने हर चुनौती को गले लगाया. हम राजनीति में जीतने के लिए ही नहीं, राजनीति को बदलने के लिए आये. हमने राजनीति में मर्यादा, नीति, संगठन की नयी रीति और नयी राजनीतिक संस्कृति स्थापित करने का बीड़ा उठाया. देश और संगठन के भीतर स्वराज हमारा नारा था, भावी इतिहास हमारा था.

आज यह यात्रा एक बार फिर चौराहे पर खड़ी है. वक़्त है ठिठक के सोचने का, पीछे मुड़के देखने का, आगे की दिशा तय करने का. राजनीति के हमारे अनुभव ने हमें बहुत कुछ सिखाया है. हमने देखा है कि आज भी नयी पीढ़ी में त्याग, बलिदान और आदर्श की कमी नहीं है. देश और दुनिया के कोने-कोने में बैठे हिन्दुस्तानी एक सुन्दर भारत के सपने के लिए आहुति देने के लिए तैयार हैं. हमने देखा है कि पाप और झूठ पर खड़े सत्ता के महल ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं. हमने देखा है कि इस देश के आम आदमी, आम औरत और अंतिम इंसान नए राजनीति को गले लगाने के लिए आतुर है. हमने देखा है कि इतिहास की धार मोड़ी जा सकती है.

इस सफ़र से हमने कुछ सबक भी सीखे हैं. जहाँ एक ओर हम अपने मंजिल के करीब आये, वहीँ दूसरी ओर हमारे सपने और हकीक़त में फासला बढ़ा भी है. हम चले थे देशव्यापी विकल्प बनने के लिए लेकिन कहीं एक क्षेत्रीय या महानगरीय दायरे में सिमट रहे हैं. एक राजनीतिक आन्दोलन महज एक चुनावी मशीन बनता जा रहा है और वॉलंटियर उस मशीन के पुर्जे. हम राजनीति को बदलें उससे पहले राजनीती हमें बदल रही है. व्यक्तिपूजा, हर कीमत पर सफलता की लालसा, मर्यादा को ताक पर रखने की प्रवृत्ति और येन, केन, प्रकारेण चुनाव जीतना और सत्ता बने रहना – यह सब बीमारियाँ हमसे दूर नहीं है. पिछले कुछ दिनों में तो हमने अपने ही घर के भीतर इन बीमारियों का घिनौना स्वरुप देखा.

हमारे कई हमसफ़र स्तब्ध हैं,क्षुब्ध हैं और चिंतित भी हैं. एक ओर तो आन्दोलन की एकता टूटने का ख़तरा है. दूसरी ओर यह ख़तरा है कि इस आन्दोलन की आत्मा इसकी काया को छोड़ ना जाए.

इतिहास के इस चौराहे पर आज हमें अपनी दिशा चुननी होगी. अगर इसी रास्ते पर चलते रहे तो क्या सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा या कि हालात बद से बद्तर होते चले जायेंगे?दूसरा रास्ता इसी काफ़िले में बने रहते हुए आंतरिक सुधार का है. लेकिन क्या उसकी गुंज़ाइश बची है? तीसरा रास्ता,राजनीति को छोड़कर गैर-राजनीतिक आन्दोलन और समाजसेवा का है. लेकिन कहीं ये पलायन तो नहीं? चौथा रास्ता,आन्दोलन की आत्मा को याद करते हुए नए सिरे और नए संकल्प के साथ इस यात्रा को बारा शुरू करने का है. लेकिन क्या हममें इसकी हिम्मत बची है? कौन होंगे इस यात्रा के हमसफ़र, कैसा होगा इस यात्रा का नक्शा?
इन सब सवालों पर खुले मन से चर्चा के लिए हमने स्वराज संवाद आयोजित किया है. यह ना तो किसी के पक्ष में लामबंदी है,ना ही किसी के खिलाफ बगावत. हमारा इरादा सच की तलाश करते हुए सर्वोच्च अनुशाषण को प्राप्त करना है,किसी अनुशाषण को तोड़ना नहीं. हाँ सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम सब बाग़ी हैं!

‘स्वराज-संवाद’ नव-वर्ष और आंबेडकर जयंती के शुभ अवसर 14 अप्रैल,2015 को सुबह 10 से शाम 5 बजे तक गुड़गांव में आयोजित किया जाएगा. संवाद स्थल दिल्ली मेट्रो के इफ्फको चौक स्टेशन के नज़दीक होगा.

संवाद में सहभागिता के लिए कुछ चुने हुए साथियों और शुभचिंतकों को ही आमंत्रित किया गया है. अगर आप अपने या किसी और हमसफ़र के लिए आमंत्रण चाहें तो पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं या फिर पर ई-मेल कर सकते हैं.

संवाद के इंतज़ार में


उज्ज्वल कुमार
मोबाइल न. : +91-9911464044

Post a Comment